प्रमोद तिवारी, सांसद, उप नेता, प्रतिपक्ष, राज्य सभा ने कहा है कि कांगे्रस पार्टी ने शुरू से ही जो आषंका व्यक्त की थी वह सच साबित हुई है। मलिलकार्जुन खड़गे, अध्यक्ष, भारतीय रष्ट्रीय कांगे्रस, नेता प्रतिपक्ष, राज्य सभा एवं राहुल गांॅधी, नेता प्रतिपक्ष, लोक सभा ने पहले ही कहा था कि एस.आई.आर. के नाम पर लोकतन्त्र को कमजोर किया जा रहा है, मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का भा.ज.पा. षड़यन्त्र कर रही है।
श्री तिवारी ने कहा है कि उत्तर प्रदेष में 2.89 करोड़ कुल वोट कटे हैं, अर्थात लगभग 3 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गये हैं, प्रदेष में लगभग 18 – 19: वोट कटे हैं, इनमें से 2.17 करोड़ (दो करोड़ सत्रह लाख) वे मतदाता है जो अनुपस्थित पाये गये हैं या फिर लापता है, अर्थात ये वे लोग है जो नौकरी वाले हैं, तमाम मजदूर वर्ग है, पिछड़े वर्ग के है, दलित वर्ग के हैं, गरीब है या फिर अल्पसंख्यक फेरी आदि लगाने वाले लोग है जो रोजी रोटी के सिलसिले मंे बाहर गये हैं, और समय से आकर फार्म नहीं भर सके। एस.आई.आर. से पहले उत्तर प्रदेष में 15 करोड़ 44 लाखा 30 हजार मतदाता थे। जिनमें से 46.23 लाख मृृतक हैं, और 25.47 लाख के नाम एक से अधिक स्थानों पर सूची में पाये गये थे । एस.आई.आर. के बाद 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता बचे है।
श्री तिवारी ने कहा है कि देष के तमाम प्रदेषों की आबादी 3 करोड़ नहीं है यहीं नहीं दुनिया के 40- 50 देष ऐसे हैं जिनकी आबादी भी तीन करोड़ नहीं है और उत्तर प्रदेष में लगभग 3 करोड़ मतदाताओं के नाम एस.आई.आर. के नाम पर मतदाता सूची से काट दिये गये हैं । क्यों काटे गये ? इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं है या तो वे समय से फार्म नहीं भर सके या फिर समय पर उपस्थित नहीं हो सके ।
श्री तिवारी ने कहा है कि कांगे्रस पर्टी का इसीलिये सुझाव था कि एस.आई.आर. की प्रक्रिया को एक- दो माह नहीं बल्कि साल – दो साल चलाना चाहिए था जिससे जो लोग बाहर गये हैं वे आ जाते, और फार्म भर देते । जो लोग बाहर जाते हैं वे साल में एक- दो बाहर वापस आते हैं तो उन्हें फार्म भरने का मौका मिला जाता किन्तु उन्हें पर्याप्त समय न देकर उत्तर प्रदेष में पूरी तरह से लोकतन्त्र का गला घोंटा गया है । एस.आई.आर. के लिये पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिसके कारण मानसिक दबाव की वजह से प्रदेष में कई बी.एल.ओ. की मौत भी हुई है ।
श्री तिवारी ने कहा है कि एस.आई.आर. के नाम पर जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गये है उनके साथ विष्वासघात और छल किया गया है उनसे मताधिकार का हक छीना गया है उसकी कीमत भारतीय जनतापार्टी को चुकानी पड़ेगी, मतदाताओं का श्राप भा.ज.पा. को लगेगा , और उत्तर प्रदेष से भारतीय जनतापार्टी का पूरी तरह सफाया होना तय है। देष को आजादी दिलाने के लिये कितनी कुर्बानी देनी पड़ी ? कितनों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये, तब जाकर देष को आजादी मिली किन्तु भा.ज.पा. को क्या पता है ? कि देष को आजादी कैसे मिली ? ये इनके संगठन तो उस समय अंगे्रजों की सेना में भर्ती होने की अपील कर रहे थे, ये तो देष की आजादी के खिलाफ थे ।
श्री तिवारी ने कहा है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू जी के नेतृृत्व में जब बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर जी ने भारत का संविधान बनाया था तो संविधान की प्रतियांॅ पुणे एवं मुम्बई सहित देष के कई स्थानों पर भा.ज.पा. व उनके संगठनों द्वारा जलायी गयी थी। भारतीय संविधान का सबसे खूबसूरत अधिकार यह है कि ‘‘राजा का भी एक वोट और गरीब का भी एक वोट’’। यह भारतीय जनतापार्टी को कभी भी पसंद नहीं आयी ।