वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन में आयोजित 15 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग-2026 के तृतीय दिवस पर लोक संस्कृति की इन्द्रधनुषी छटा देखने को मिली। भव्य मंच पर दिनभर चले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विभिन्न प्रतियोगिताओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे छोलिया दल की प्रस्तुतियों ने बीच-बीच में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं की जीवंत झलक पेश की।
पर्वतीय महापरिषद की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित कौथिग के तृतीय दिवस की शुरुआत एकल एवं सामूहिक नृत्य प्रतियोगिताओं से हुई। विभिन्न आयु वर्गों में कुल 53 प्रतिभागियों ने अपनी नृत्य कला से निर्णायक मंडल और दर्शकों का दिल जीता। प्रतियोगिता का संचालन जे.पी. डिमरी एवं ज्ञान पंत ने किया, जबकि निर्णायक मंडल में आकांक्षा आनंद और मेनका सक्सेना रहीं। विभिन्न वर्गों में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए, वहीं सामूहिक नृत्य में जोहार सांस्कृतिक संस्था सहित कई दलों ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद विकास नगर से आए क्षेत्रीय कलाकारों ने पारंपरिक परिधानों में गीत-संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों से मंच को सजीव बनाए रखा। इसी क्रम में कौथिग मंच से म्यूजिकल उत्तराखंड स्टूडियो द्वारा निर्मित उत्तराखंडी गीत ‘चम्म मुखड़ी’ का विमोचन किया गया। नदी किनारे खिली धूप और मेले की रौनक ने बड़ी संख्या में आए दर्शकों को आकर्षित किया। ठंड के कारण गर्म कपड़ों के स्टॉलों पर खरीदारों की खासी भीड़ देखने को मिली।
सायंकालीन सत्र का शुभारंभ उत्तरायणी के शीर्षक गीत के साथ हुआ। मुख्य अतिथि पुष्पिला बिष्ट ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया। सांस्कृतिक संध्या में ईशा मर्तोलिया, चन्द्रकला, राकेश जोशी और आनंद कपकोटी सहित लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कौथिग के माहौल को उत्सवमय बना दिया।