Friday , October 7 2022
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साहित्य

आशा वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा सेवा समर्पण सम्मान से सम्मानित हुईं विभूतियां

– आशा कला सम्मान पाकर कलाकार बच्चो के खिले चेहरे। वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा लखनऊ 1 अक्टूबर। सामाजिक कार्यों में योगदान दे रही राजधानी की अग्रणी संस्था आशा वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से ऑडिटोरियम, अकाउंट्स एंड फाइनेंस डिपार्टमेंट में शनिवार को “सेवा समर्पण सम्मान समारोह” एवं “सांस्कृतिक …

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मां गोमती तट पर कविताओं के रंग बिखरे

वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा लखनऊ 12 सितंबर। मां दुर्गा साहित्यिक एवं सास्कृतिक संस्था द्वारा कवयित्री गोष्ठी का आयोजन कुड़िया घाट में मां गोमती के तट पर किया गया। गणेश उत्सव के समापन के साथ इस गोष्ठी में साहित्यकारों नें साहित्य में रस भरते हुए खूब आनंद लिया। …

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

जन्म लियों कान्हा ने पुरवाई । नन्द जी दे दो अब बधाई।। नयन हैं उनके काले काले, जैसे चन्दा हो मतवाले। ब्रज की भूमि हो गई माले।। पलकें पुलकित हैं हर्षाई, देखें यशुदा हीरे-मोती लाई। बांटि दियों गोकुल माहो माई।। यमुना चरण तकि आई बढ़ि, धान्य हो दर्शनि करिकैं माई। …

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एक रक्षाबंधन ऐसा भी

साहित्यजगत की अनूठी दास्ताँ, प्रयागराज में किसी घर के बाहर एक रिक्शा रुकता है। उसमें से उतरकर एक भाई अपनी बहिन को आवाज लगाता है, जरा 12 रुपैया ले के तो आओ। बहिन बाहर आकर पूछती है कि 12 रुपये काहे चाहिए तो भाई उत्तर देता है दुई रुपैया इस …

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नारी की वेदना व संवेदना ही मेरे लेखन का मूल आधार – डॉ अर्चना प्रकाश

वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा लखनऊ। अमृत महोत्सव के उपलक्ष में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अर्चना प्रकाश की दो नवल कृतियों 1. गांधारी का पुनर्जन्म कहानी संग्रह एवं 2. बूंद और बादल काव्य संग्रह का साहित्य आराधन संस्था के सौजन्य से लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा गोपाल …

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“पिता, क्या लिखूं तुम्हारे लिए”

आगरा/संतोष कुमार वर्मा पिता, क्या लिखूँ तुम्हारे लिए, कभी जो समझ ना आये, आया बस इतना ही समझ, करते रहे समझौते, हमारे लिए, अपनी ख़ुशियों का, अपनी इच्छाओं का, करते रहे दमन, पता नहीं कैसे कंधे हैं, कभी थकते ही नहीं, बोझ उठाते, पिता, पीता है हलाहल, शिव की तरह, …

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कामकाजी महिलाओं की दोहरी भूमिका

लखनऊ/रेशु राज सोनी वर्तमान समय में यह देखा जा रहा है कि शिक्षण सेवा क्षेत्र ने महिलाओ को अत्यधिक आकर्षित किया है। निश्चित अवधि तक कार्य, निश्चित नियम, राजनीतिक हस्तक्षेप का अभाव, सापेक्ष सुरक्षा आदि अनेक ऐसे कारक है जिससे महिलाओं का आकर्षण शिक्षण क्षेत्र की तरफ बढ़ा है। लेकिन …

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पिता का जीवन में महत्व

लखनऊ / गरिमा संघर्ष का दूसरा नाम है पिता बचपन से जो हमें सपने दिखाए वो है पिता ऊँगली पकड़कर जो चलना सिखाये वो है पिता हमारी जागीर और जमीर है पिता ऊपर से डाट दिखाता और अंदर ही अंदर रोता वो है पिता जाग कर सारी रात ख्बाब बुनता …

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दहेज नारी शक्ति का अपमान है

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ रेशु राज सोनी लखनऊ 24 अप्रैल। माँ, बाप, बहिन और भाभियों से गले मिलती, पितृगृह की हर वस्तु को हसरत से निहारती, एक भारतीय बेटी की उपर्युक्त उक्ति किसके हृदय को द्रवित नहीं कर देती है। “देहरिया पर्वत भई, आँगन भयो विदेस। ले बाबुल घर आपनौ, …

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नोमोफोबिया : चार्जिंग के वक्त मोबाइल से बनाये दूरी, अन्यथा तैयार रहें ……………….

रेशु राज सोनी लखनऊ 17 अप्रैल। आज के समय में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करता हो। लेकिन अगर किसी को स्मार्टफोन के बिना कुछ देर रहने में ही हालत खराब होने लगे या फिर फोन से दूर रहने के ख्याल से ही पसीना …

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