वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राज्य संग्रहालय, लखनऊ, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश एवं अवध चिकनकारी प्रो० क० लि0, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में कला अभिरूचि पाठ्यक्रम के अन्तर्गत चिकनकारी पर आधारित कार्यशाला एवं व्याख्यान का शुभारम्भ मंगलवार को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतुल जैन, जनरल सेक्रेटरी, दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। मुख्य अतिथि ने कहा कि हमें इस प्रकार की कार्यशालायें अन्य इलाकों में भी कराते रहना चाहिये जो कि आज के समय में अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं रोजगार परक होगी।
सात दिवसीय कार्यशाला में दी जाने वाली जानकारी एवं कार्यक्रम की रूपरेखा पर डॉ० मीनाक्षी खेमका, सहायक निदेशक ने प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ० मीना श्रीवास्तव, निदेशक, अवध चिकनकारी प्रो० क० लि0, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड लखनऊ द्वारा बताया गया कि यह कार्यशाला प्रशिक्षुओं के लिए काफी उपयोगी होगा, क्योंकि चिकनकारी की कला को देश-विदेश तक भेजने के लिए इनको विपणन, टांके की ट्रेनिंग देने के साथ ही काफ्ट की बारीकियों को इस कार्यशाला में बताया जायेगा। उनके द्वारा यह भी कहा गया कि चिकनकारी वस्त्रकला को विकसित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं को चलाया जा रहा है जिसमें प्रमुख रूप से एक जिला एक उत्पाद ट्रेडिंग टेक्निक, रिसर्च एण्ड डेवलपमेण्ट तथा अल्प एवं मध्यम उद्योग के बारे में भी जानकारी दी गयी ।
मुख्य वक्ता डॉ0 अनामिका पाठक, पूर्व क्यूरेटर, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली द्वारा कशीदाकारी कला कौशल की कलात्मक अभिव्यक्ति और उपयोगिता विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा गया कि कशीदाकारी क्या विधा है और इसके कितने स्वरूप हो सकते हैं तथा इसके माध्यम से छोटे से बड़े स्तर पर कशीदाकारी की जा सकती हैं। पुराने कशीदाकारों द्वारा बनायी गयी कुछ ऐसी नायाब कशीदाकारी वस्तुएं देखने को मिलती हैं, जो कि हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि उनके कल्पना करने की कोई सीमा नहीं थी जिसकी झलक भारत की कशीदाकारी में देखने को मिलती है। कश्मीर के राजा गुलाब सिंह के निर्देश पर चार शॉल बनाये गये थे जिनमें से भारत में एक उपलब्ध है । कार्यशाला की परिकल्पना डा० सृष्टि धवन, निदेशक, राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा की गयी। कार्यक्रम में डॉ० अनिता चैरसिया, शारदा प्रसाद त्रिपाठी, प्रमोद कुमार, मनोजनी देवी, शशिकला राय, गायत्री गुप्ता, राहुल सैनी, अनुराग द्विवेदी आदि की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इस अवसर पर डॉ0 विनय कुमार सिंह, डॉ० कृष्ण ओम सिंह, अमित द्विवेदी, राधे लाल, धनन्जय कुमार राय, बृजेश यादव एवं उ0प्र0 संग्रहालय निदेशालय एवं लोक कला संग्रहालय, लखनऊ के कार्मिकगण उपस्थित रहे ।