– रेल सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों की रियायत पर “नीति स्तर पर विचार” चल रहा है। हालांकि बजट में जिक्र न होना इस बात का संकेत है कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकताओं में यह मुद्दा ऊपर नहीं है।
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट 2026–27 पेश कर दिया, लेकिन इस बजट में देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों की उम्मीदें एक बार फिर अधूरी रह गईं। हर साल बजट से पहले बुजुर्गों को यही आस रहती है कि रेलवे में उन्हें मिलने वाली किराया रियायत बहाल होगी, लेकिन इस बार भी इस मुद्दे पर कोई घोषणा नहीं की गई।
बताते चलें की कोरोना महामारी से पहले भारतीय रेलवे पुरुष वरिष्ठ नागरिकों को 40 प्रतिशत और महिला वरिष्ठ नागरिकों को 50 प्रतिशत किराये में छूट देता था। मार्च 2020 में कोविड के दौरान यह सुविधा बंद कर दी गई थी। उस समय कहा गया था कि परिस्थितियां सामान्य होने पर यह रियायत दोबारा शुरू की जाएगी, लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी बजट 2026 में इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। बजट में जहां सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया गया है, जिनमें मुंबई से पुणे, दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी जैसे मार्ग शामिल हैं, वहीं बुजुर्ग यात्रियों की बुनियादी जरूरतों पर सरकार की चुप्पी साफ नजर आई। जिन शहरों के बीच अब कम समय में यात्रा की बात की जा रही है, वहीं पेंशन और सीमित आय पर निर्भर वरिष्ठ नागरिकों के लिए लगातार बढ़ते रेल किराये चिंता का विषय बने हुए हैं।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों की रियायत समाप्त होने से रेलवे को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। हालांकि, वरिष्ठ नागरिक संगठनों का सवाल है कि क्या इस आय का एक हिस्सा उन लोगों को राहत देने में नहीं लगाया जा सकता, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सेवा में लगाया है।
बजट 2026 में रेलवे को रिकॉर्ड 2.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन मिला है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में ‘विकसित भारत’ का बार-बार उल्लेख किया। वरिष्ठ नागरिक संगठनों का कहना है कि विकास का अर्थ केवल तेज ट्रेनें और आधुनिक स्टेशन नहीं, बल्कि समाज के बुजुर्ग वर्ग के प्रति संवेदनशीलता भी होना चाहिए।