वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश में आरटीई के माध्यम से प्रवेश के लिए दो फरवरी से रजिस्ट्रेशन की शुरुआत कर दी गई है। इस वर्ष प्रदेश के करीब 68 हजार निजी स्कूलों में उपलब्ध 6.80 लाख सीटों पर प्रवेश दिया जाना है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने इस बार अधिक से अधिक बच्चों को आरटीई के तहत लाभ पहुंचाने के लिए रणनीति में बदलाव किया है। विभाग द्वारा प्रतिदिन मुख्यालय स्तर से आवेदनों की निगरानी की जाएगी। जिन जिलों से अपेक्षाकृत कम आवेदन प्राप्त होंगे, वहां के अधिकारियों से सीधे संपर्क कर आवेदन बढ़ाने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके लिए अलग से संपर्क और जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। आरटीई के तहत प्रवेश के लिए इस बार आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण के तहत दो फरवरी से 16 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। इसी अवधि में आवेदनों का सत्यापन कर उन्हें लॉक भी किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया साथ-साथ चलती रहे, ताकि समय पर सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।
समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रतिदिन होने वाली मॉनीटरिंग में प्राप्त आवेदनों और उनके सत्यापन की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सत्यापन के लिए समय कम होने के कारण आवेदन के साथ ही सत्यापन की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। जिन आवेदनों को निरस्त किया जाएगा, उनकी भी सैंपल जांच कराई जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छोटी-छोटी त्रुटियों के कारण आवेदन खारिज न हों और जहां संभव हो, उन्हें दुरुस्त कराया जा सके। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है और अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा पात्र बच्चों का आरटीई के तहत प्रवेश सुनिश्चित कराया जाए।