वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। लखनऊ शहरवासियों के लिए हाउस और वाटर टैक्स जमा करने की प्रक्रिया अब आसान हो जाएगी। एक अप्रैल 2026 से गृहकर और जलकर के बिल एक साथ जारी होंगे, जिससे लोगों को अलग-अलग कार्यालयों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इसके लिए नेशनल इंफार्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने नया सॉफ्टवेयर तैयार किया है और नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से यह सुविधा लागू होगी।
नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह और जलकल महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ने बताया कि इस पहल से करीब साढ़े पांच लाख भवनों और उनके निवासियों को फायदा होगा। नए बिल में गृहकर और जलकर का विवरण अलग-अलग रहेगा, जिससे दोनों की रकम आसानी से पता चल सकेगी। भवनस्वामी के लिए यह सुविधा भी उपलब्ध होगी कि वे आर्थिक सहूलियत के हिसाब से दोनों बिलों को दो किस्तों में जमा कर सकेंगे। एक साथ भुगतान करना अनिवार्य नहीं होगा। शासन के आदेश के बाद करीब एक वर्ष से चल रही गृहकर और जलकर बिल को एकीकृत करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
अशोक सिंह और कुलदीप सिंह ने बताया कि पहले नगर निगम और जलकल विभाग के आंकड़ों का मिलान किया गया, फिर बिल एक साथ किया गया। जलकल विभाग उन भवनों से जलकर व सीवर कर वसूलता है, जिनमें पानी या सीवर की लाइन भवन के 100 मीटर के दायरे में हो। वहीं नगर निगम अपने क्षेत्र की सभी भवनों से गृहकर वसूलता है। इस नई व्यवस्था से न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक सहूलियत भी बढ़ेगी। नगर निगम की ओर से कहा गया है कि गृहकर और जलकर पर मिलने वाली छूट पहले की तरह जारी रहेगी। इस एकीकृत बिल से लखनऊवासियों के लिए टैक्स भुगतान प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बन जाएगी, जिससे साढ़े पांच लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
बिल एक होने से ये होंगे फायदे :
– भवनस्वामी एक जगह पर गृहकर और जलकर जमा कर सकेंगे। अलग-अलग कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा।
– भवनस्वामी को नामांतरण कराने के लिए दो विभाग जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
– जलकल विभाग को जलकर वसूली के लिए अपने कर्मचारी नहीं लगाने पड़ेंगे।
– जलकल विभाग अलग-अलग महीनों में बिल जारी करता है। नई व्यवस्था में एक साथ ही बिल जारी हो जाएंगे।
-गृहकर संशोधित होने पर जलकर में संशोधन के लिए जलकल विभाग नहीं जाना पड़ेगा।