वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। ज्योतिष शास्त्र में गुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, भाग्य और समृद्धि का कारक ग्रह माना गया है। गुरु का नक्षत्र परिवर्तन भी उतना ही प्रभावशाली माना जाता है, जितना राशि परिवर्तन। जनवरी 2026 में गुरु बृहस्पति पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे पद में विराजमान हैं और 1 फरवरी से पुनर्वसु नक्षत्र के पहले पद में प्रवेश करेंगे। पुनर्वसु नक्षत्र को सकारात्मक ऊर्जा, नवचेतना और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी स्वयं गुरु बृहस्पति हैं, इसलिए इसका प्रभाव और भी गहरा माना जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार गुरु के इस बदलाव से कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, विशेष रूप से मेष, मिथुन और तुला राशि के जातकों के लिए अच्छे दिन शुरू होने के संकेत हैं।
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु बृहस्पति का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश अत्यंत शुभ माना जा रहा है। नौकरी और व्यवसाय में प्रगति के योग बन रहे हैं। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी। निवेश के मामलों में समझदारी से लिए गए निर्णय लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं।
मिथुन राशि के जातकों पर गुरु का यह गोचर शिक्षा और करियर के क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव डालेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सफलता मिलने के योग हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए नए संपर्क और अवसर सामने आएंगे। आर्थिक मामलों में थोड़ी सतर्कता जरूरी रहेगी, लेकिन कुल मिलाकर स्थितियां अनुकूल रहेंगी।
तुला राशि के जातकों के लिए गुरु बृहस्पति का नक्षत्र परिवर्तन भाग्यवर्धक साबित हो सकता है। नई नौकरी या व्यापार से जुड़े अवसर मिल सकते हैं। यात्राओं के योग बनेंगे और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। रिश्तों में मधुरता आएगी और आर्थिक लाभ के संकेत मिलेंगे। इस दौरान किए गए प्रयास भविष्य में अच्छे परिणाम देंगे।