वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने पश्चिम एशिया में बने तनावपूर्ण हालात के बीच देश में उत्पन्न ऊर्जा संकट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में रसोई गैस की किल्लत और पेट्रोल-डीजल को लेकर मचे हाहाकार के बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पूरी तरह बेपरवाह नजर आ रही है।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र पर साफ दिखाई दे रहा है, लेकिन सरकार इस राष्ट्रीय संकट को समझने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी की खबरें आ रही हैं और रसोई गैस के लिए लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय लिए गए निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय ऐसी आपात परिस्थितियों के लिए 45 दिनों का ऊर्जा स्रोत रिजर्व रखने की व्यवस्था की गई थी। तिवारी ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह रिजर्व अब कहां है और मौजूदा संकट के समय उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है।
श्री तिवारी ने कहा कि ईंधन की कमी के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और होटल-रेस्तरां तक बंद होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। साथ ही एयर इंडिया के टिकटों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को लेकर भी उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। तिवारी ने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार को जनता के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन इसके विपरीत एयर इंडिया को अधिक कमाई की छूट दी जा रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान को भी सच्चाई से परे बताते हुए कहा कि सरकार के दावे और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के बावजूद प्रधानमंत्री की चुप्पी रहस्यमय है। तिवारी ने सरकार से मांग की कि वह बिना किसी दबाव के देश में पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य करने के लिए ठोस कदम उठाए। यह बयान कांग्रेस के मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से जारी किया गया।