वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
आगरा/फिरोजाबाद। गौ संरक्षण को लेकर चल रही 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ यात्रा के तहत उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आगरा और फिरोजाबाद में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करते हुए गौ रक्षा को भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक चेतना से जुड़ा विषय बताया। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का उच्चारण करते हुए गौ संरक्षण का संकल्प लिया।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धतियों में गाय का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने कहा कि दीपक के घी से लेकर पंचामृत, यज्ञ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों तक गाय से प्राप्त सामग्री का उपयोग होता है, इसलिए गौ संरक्षण केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक विषय भी है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि गौ रक्षा का प्रश्न लंबे समय से समाज की भावनाओं से जुड़ा रहा है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी गौ संरक्षण के मुद्दे के प्रभाव का जिक्र किया और कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए जागरूक रहना चाहिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौवंश की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में देसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है। सभा में उन्होंने नागरिकों से लोकतांत्रिक अधिकारों का सजगता से उपयोग करने और जनप्रतिनिधियों से गौ संरक्षण के मुद्दे पर जवाबदेही तय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है और समाजहित से जुड़े विषयों पर जागरूक भागीदारी आवश्यक है।
यात्रा के दौरान उपस्थित लोगों ने गौ संरक्षण के समर्थन में संकल्प व्यक्त किया। आयोजकों के अनुसार, 3 मई को गोरखपुर से शुरू हुई यह यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने बताया कि 24 जुलाई को लखनऊ में यात्रा के समापन अवसर पर विशाल महासंकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें आगे की रणनीति की घोषणा की जाएगी।