वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
संत कबीर नगर। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को खलीलाबाद में हिंदुत्व, गो-संरक्षण और अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गाय करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए केंद्र सरकार को गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग गाय के विषय पर मौन रहते हैं, उन्हें हिंदुत्व की बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
खलीलाबाद स्थित आर्य समाज मंदिर के पास स्वागत कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि गो-संरक्षण किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के समय गाय को केवल पशु की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन स्वतंत्र भारत में इस विषय पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
उन्होंने दावा किया कि अब समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी गो-संरक्षण और गाय को सम्मान देने की मांग के समर्थन में आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक नजरिए से देखा जाना चाहिए। हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने के दावों पर शंकराचार्य ने कहा कि यह बात तथ्यहीन प्रतीत होती है। उन्होंने बताया कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियां लगभग 10 इंच चौड़ी और छह इंच ऊंची हैं, जहां खड़े होकर नमाज अदा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि यदि ऐसा कोई वीडियो या प्रमाण उपलब्ध है तो उसे सामने लाया जाए।
शंकराचार्य ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हिंदुत्व किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कृति और परंपरा के प्रति आस्था रखने वाले लोग सभी दलों में मिल सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए जागरूक रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में स्वागत का नेतृत्व सपा नेता अरविंद वर्मा और केडी यादव ने किया।