वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। शिक्षकों को उत्कृष्टता, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ानी चाहिए। यही प्रतिस्पर्धा प्रदेश और देश के भविष्य को नई दिशा देगी। शिक्षक दिवस पर शनिवार को योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 81 शिक्षकों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव आया है। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आईसीटी लैब, बेहतर पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और 15 हजार से अधिक में आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं। 261 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करना केवल घोषणा करने से संभव नहीं होता। 1.60 करोड़ बच्चों के खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि पहुंचाना, आपरेशन कायाकल्प और प्रोजेक्ट अलंकार जैसे कार्य धरातल पर किए गए हैं। तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सैफई महोत्सव और बग्घी पर खर्च होने वाली राशि का कुछ हिस्सा शिक्षा पर लगाया जाता तो लाखों बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता था।
सीएम योगी ने प्रदेश को बदनाम करने के लिए दूसरे राज्यों के जर्जर विद्यालयों के वीडियो यूपी के नाम से प्रसारित किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के दौर में शिक्षकों को एआई, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। तकनीक शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती, क्योंकि मशीन उत्तर दे सकती है, लेकिन प्रश्न करना और संस्कार देना शिक्षक ही सिखाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में दंगा, कर्फ्यू और अराजकता का माहौल था, जबकि अब त्योहार शांतिपूर्वक मनाए जा रहे हैं। उन्होंने शिक्षक को प्रदेश के भविष्य का निर्माता बताते हुए कहा कि बच्चों को योग्य और संस्कारी बनाना ही शिक्षक की सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा है।