वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
मुरादाबाद। रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिकी विधेयक प्रतिनिधि सभा में अटकने से मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों को फिलहाल राहत मिली है। प्रस्तावित कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इसके लागू होने पर भारत की ऊर्जा लागत बढ़ने के साथ उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन और लॉजिस्टिक्स महंगे होने की आशंका थी। हालांकि विधेयक के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए निर्यातक इसे स्थायी राहत के बजाय फिलहाल मिली मोहलत मान रहे हैं।
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नावेद उर रहमान ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर पूरे निर्यात कारोबार पर पड़ता है। कच्चे माल की ढुलाई से लेकर तैयार माल को बंदरगाह तक पहुंचाने की लागत बढ़ जाती है। अधिकांश हस्तशिल्प इकाइयां एमएसएमई आधारित हैं और पहले ही कच्चे माल की कीमतों, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी टैरिफ के दबाव में हैं।
मुरादाबाद के पीतल, मेटलवेयर, होम डेकोर और सजावटी उत्पादों की अमेरिका में बड़ी मांग है। भारतीय माल महंगा होने पर ऑर्डर चीन, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की ओर जा सकते हैं। ऐसे में निर्यातकों की नजर रूस प्रतिबंध विधेयक के साथ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अंतिम टैरिफ व्यवस्था पर भी है।
निर्यातकों का कहना है कि वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब भारतीय हस्तशिल्प को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले टिकाऊ टैरिफ लाभ मिले। फिलहाल बड़ा जोखिम टला है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ की तलवार बरकरार है।