वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
वाराणसी। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से वाराणसी में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर 70.68 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 71.26 मीटर है और जलस्तर करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। गंगा के साथ वरुणा नदी के उफान ने भी तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
बाढ़ के कारण अब तक 566 परिवारों के 1381 लोग अपने घर छोड़कर शेल्टर होम में पहुंच चुके हैं। वहीं, 3843 लोग रिश्तेदारों, परिचितों या किराये के मकानों में शिफ्ट हुए हैं।
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर दाह संस्कार करना भी चुनौती बन गया है। मणिकर्णिका घाट तक शव पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। शवयात्रियों को कीचड़, मलबे और घुटनों से लेकर कंधे तक पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह किया जा रहा है।
जलस्तर बढ़ने से एसटीपी के संचालन पर भी संकट मंडरा रहा है। फिलहाल सभी एसटीपी संचालित हैं, लेकिन खतरे का निशान पार होने पर बैकफ्लो और सीवर में बारिश का पानी व गाद आने से संचालन प्रभावित हो सकता है। नगवा नाला का पानी रामेश्वर मठ में घुस गया है। मठ के निचले तल में करीब आधा फीट पानी भरने के बाद वहां रहने वाले छात्रों को दूसरी जगह भेज दिया गया। मारुति नगर में करीब 24 मकानों के आसपास एक से दो फीट पानी भर गया है। बिजली आपूर्ति बंद होने से लोग परेशान हैं। पिपरी गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिर गया है और कई मार्गों पर पानी भरने से संपर्क टूट गया है। राजभर बस्ती के लोग नाव से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।