वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। करीब एक सदी पुरानी दिल्ली रेस क्लब की पहचान गुरुवार को बुलडोजर कार्रवाई के बाद बदल गई। केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित रेस क्लब की करीब 53 एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया। इसके बाद परिसर में मौजूद कई पुराने ढांचों को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई। इनमें घोड़ों के अस्तबल, बुकमेकर रिंग, विनिंग पोस्ट और फोटोफिनिश से जुड़े ढांचे शामिल बताए गए हैं।
केंद्र सरकार की ओर से जमीन पर कब्जा लेने की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। कार्रवाई रोकने के लिए रेस क्लब प्रबंधन ने अदालत का रुख किया था और अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को क्लब की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से परिसर खाली कराने और जमीन अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
अदालती कार्रवाई से पहले संपदा अधिकारी ने 11 अगस्त को सार्वजनिक परिसर से अनधिकृत कब्जा हटाने से संबंधित कानून के तहत बेदखली आदेश जारी किया था। अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद गुरुवार को प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई। सुबह परिसर में बुलडोजर पहुंचने के बाद पुराने निर्माणों को हटाया गया। परिसर में लगाए गए नोटिस के अनुसार रेस कोर्स क्षेत्र के पास स्थित जमीन को अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया है। इसके बाद संपत्ति भूमि एवं विकास कार्यालय को सौंप दी गई है। भूमि एवं विकास कार्यालय केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आता है।
दिल्ली रेस क्लब लंबे समय से घुड़दौड़ की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। करीब 100 वर्ष पुराने इस क्लब की घुड़दौड़ से जुड़ी परंपरा दिल्ली की पहचान का हिस्सा रही है। परिसर में घोड़ों के अस्तबल से लेकर दौड़ और परिणामों से जुड़े कई पुराने ढांचे मौजूद थे। इनके ढहाए जाने के बाद क्लब की पुरानी तस्वीर बदल गई है। केंद्र के जमीन पर कब्जे और ढांचों को हटाए जाने के बाद रेस क्लब से जुड़ी घुड़दौड़ गतिविधियों पर भी विराम लग गया है। क्लब के भविष्य और 53 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित विकास को लेकर फिलहाल केंद्र की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।