वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर कथित अवैध रूप से निर्मित मस्जिद को प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में सियासी टकराव तेज हो गया है। शनिवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई की गई। प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद की गई है। विपक्षी दलों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है, जबकि भाजपा ने इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई कार्रवाई बताया है।
प्रशासन के मुताबिक कलेक्ट्रेट परिसर की खसरा संख्या 539 की जमीन सरकारी अभिलेखों में कचहरी/कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज है। इसके करीब 315 वर्ग मीटर हिस्से में मस्जिद का निर्माण किया गया था। मामले की शिकायत के बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई। प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के बाद निर्माण को अवैध मानते हुए इसे 30 दिन के भीतर हटाने का आदेश दिया गया था। मुस्लिम पक्ष की ओर से आदेश के खिलाफ अपील की गई, जिसे खारिज किए जाने के बाद शनिवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। कैराना की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने के लिए निकलीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर हाउस अरेस्ट कर दिया। सहारनपुर सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई को संविधान के लिए काला दिन बताते हुए मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही है और ऊपरी अदालतों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार किया जाना चाहिए था। बसपा प्रमुख मायावती ने भी कार्रवाई और उससे पैदा हुई स्थिति पर सवाल उठाए।
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई अदालत के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। इसे किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।