वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार खास संयोग लेकर आ रहा है। सावन मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस त्योहार में बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए शुभ समय की उपलब्धता को लेकर राहत रहेगी।
कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन :
ज्योतिषीय गणना के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। उदयकालिक पूर्णिमा तिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त :
रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक रहेगा। इस तरह बहनों को राखी बांधने के लिए कुल 3 घंटे 51 मिनट का समय मिलेगा। इस अवधि में विधि-विधान के साथ भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा जा सकता है।
भद्रा का नहीं रहेगा प्रभाव :
रक्षाबंधन पर भद्रा काल का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधने से बचना चाहिए। वर्ष 2026 में राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसलिए राखी बांधने के शुभ समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा।
राहुकाल में राखी बांधने से बचें :
शुभ कार्य के लिए राहुकाल का भी ध्यान रखना चाहिए। रक्षाबंधन के दिन सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस अवधि में राखी बांधने से बचना उचित माना जाता है।
पूजा की थाली में रखें ये सामग्री :
राखी बांधने से पहले पूजा की थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रखें। सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं और अक्षत लगाएं। इसके बाद आरती उतारकर दाईं कलाई पर राखी बांधें और भाई को मिठाई खिलाएं। इस तरह विधि-विधान से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है।