वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का महीना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त व्रत, जलाभिषेक और विधि-विधान से पूजा कर महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इस बार सावन का दूसरा सोमवार बेहद खास रहने वाला है। 10 अगस्त, सोमवार को सावन का दूसरा सोमवार और सावन माह का पहला सोम प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ रहा है। सोमवार और प्रदोष व्रत के इस संयोग से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
सावन का पहला सोम प्रदोष व्रत 10 अगस्त को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी और 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के लिए शाम 7:09 बजे से रात 9:23 बजे तक का समय शुभ रहेगा। श्रद्धालु इस अवधि में भगवान शिव का जलाभिषेक, अभिषेक और पूजन कर सकते हैं।
सावन के दूसरे सोमवार पर शिव पूजा के लिए सुबह और दोपहर में भी शुभ मुहूर्त रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 बजे से 5:34 बजे तक रहेगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:18 बजे से 1:09 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की आराधना करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।
सोम प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में चंद्र दोष से प्रभावित लोगों के लिए भी सोम प्रदोष व्रत को विशेष फलदायी बताया गया है। कहा जाता है कि विधिपूर्वक शिव आराधना से चंद्रमा से जुड़े अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायता मिलती है। ऐसे में 10 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए पूजा और साधना की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।