वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति को लेकर नौ अगस्त को प्रस्तावित कारसेवा के आह्वान के बाद मथुरा में साधु-संतों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कुछ संतों की ओर से कारसेवा का आह्वान किए जाने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि कारसेवा के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई है और जन्मभूमि से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर सच्चिदानंद महाराज ने गोवर्धन रोड स्थित अपने आश्रम पर नौ अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कारसेवा का आह्वान किया था। इसके बाद ब्रज क्षेत्र के साधु-संतों में इसको लेकर अलग-अलग राय सामने आई। दिनेश शर्मा ने दावा किया कि कारसेवा का ऐलान करने वाले संतों ने अपना आह्वान वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण हिंदू समाज को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान मिलने का भरोसा है। कारसेवा के आह्वान को देखते हुए जिला प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख साधु-संतों को पाबंद किया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने रविवार को जन्मभूमि की ओर जाने का प्रयास कर रहे कुछ लोगों को रोककर वापस भेज दिया।
एसपी सिटी राजीव कुमार ने बताया कि कारसेवा के लिए लोगों से पहुंचने की अपील की गई थी, लेकिन इसके लिए कोई अनुमति नहीं थी। पुलिस ने ऐसे लोगों को रोककर उनके संबंधित थाना क्षेत्रों में वापस भेजा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रतिबंध लागू हैं। ऐसी गतिविधियों अथवा नई धार्मिक परंपरा शुरू करने की अनुमति नहीं है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।
पुलिस ने आगरा से आई मीरा ठाकुर को भी जन्मभूमि की ओर जाने से रोककर प्रतिबंधों की जानकारी दी और वापस भेज दिया। प्रशासन ने संबंधित संगठनों को न्यायालय के निर्देशों से अवगत कराया है। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है।