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PRASHAD योजना से तीर्थ स्थलों का विकास, धार्मिक पर्यटन को मिल रही नई गति

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
गुवाहाटी। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने और देश की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के उद्देश्य से असम के मीडिया दौरे पर आए उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को गुवाहाटी स्थित नीलाचल पहाड़ी पर मां कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए। पत्र सूचना कार्यालय (PIB), लखनऊ के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर की धार्मिक परंपराओं, आध्यात्मिक महत्व और पर्यटन संभावनाओं की जानकारी ली।
मंदिर के पुजारी प्रांजीत शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को मां कामाख्या मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और प्रमुख अनुष्ठानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मां कामाख्या देवी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है और शक्ति उपासना की महत्वपूर्ण परंपरा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मंदिर असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मीडिया प्रतिनिधिमंडल को पर्यटन मंत्रालय की PRASAD योजना के बारे में भी जानकारी दी गई। वर्ष 2014-15 में शुरू की गई इस योजना का अक्टूबर 2017 में नाम बदलकर ‘National Mission on Pilgrimage Rejuvenation, Spiritual and Heritage Augmentation Drive (PRASHAD)’ किया गया था। योजना के तहत प्रमुख तीर्थ और आध्यात्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विकास, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रांजीत शर्मा ने कहा कि धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और रोजगार व आजीविका के अवसर बढ़ते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने पूजा-अर्चना के साथ मंदिर की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना। सदस्यों ने कहा कि ऐसे दौरे देश की विविध आध्यात्मिक परंपराओं को समझने और उन्हें देशभर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। PRASHAD योजना को तीर्थ स्थलों के सुनियोजित विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल बताया गया।

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