“KSSSCI में हमारी प्रतिबद्धता मरीज़ तक सीमित नहीं है। मरीज़ के ठीक होने की राह उनके परिजनों की मानसिक और शारीरिक स्थिति से जुड़ी होती है। हमें गर्व है कि हमने इस पहल को अपने परिसर में संभव बनाया — और पहले ही दिन 360 परिजनों का आना इस बात का प्रमाण है।” — प्रो. (डॉ.) एम.एल.बी. भट्ट, निदेशक, KSSSCI
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान (केएसएसएससीआई) में कैंसर मरीजों के तीमारदारों के लिए शनिवार से ‘अपनी थाली’ पहल की शुरुआत की गई। पहले ही दिन 360 परिजनों ने इस योजना का लाभ उठाते हुए गरम और पौष्टिक रात्रि भोजन ग्रहण किया। यह पहल आरएवीसी फाउंडेशन ने केएसएसएससीआई और शारदा वेलफेयर सोसायटी के सहयोग से शुरू की है।
कार्यक्रम का शुभारंभ चिकित्सकीय अधीक्षक डॉ. वरुण विजय ने पहली थाली परोसकर किया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. एम.एल.बी. भट्ट ने कहा कि अस्पताल की जिम्मेदारी केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके साथ रहने वाले परिजनों की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पहले ही दिन अपेक्षा से अधिक 360 लोगों का भोजन के लिए पहुंचना इस पहल की उपयोगिता को दर्शाता है।
संस्थान प्रशासन ने इस योजना के लिए भोजन कक्ष, स्टील के बर्तन, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं तथा समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है। अस्पताल में प्रतिदिन शाम सात से नौ बजे के बीच तीमारदारों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के तहत प्रतिदिन 200 से 250 लोगों को भोजन कराने का लक्ष्य रखा गया है।
आरएवीसी फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राम अनुज वर्मा ने कहा कि ‘अपनी थाली’ केवल भोजन उपलब्ध कराने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि कठिन समय से गुजर रहे परिवारों के साथ संवेदनशीलता और सम्मान के साथ खड़े रहने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन इस पहल का वित्तपोषण कर रहा है।
शारदा वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अतुल तिवारी ने बताया कि संस्था एफएसएसएआई मानकों के अनुरूप भोजन तैयार करने और वितरण की जिम्मेदारी निभा रही है। इस अभियान के माध्यम से महिलाओं सहित अनौपचारिक श्रमिकों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ‘अपनी थाली’ की विशेषता यह है कि भोजन एक रुपये के स्वैच्छिक अंशदान पर उपलब्ध कराया जाता है। यदि कोई अंशदान नहीं दे पाता, तब भी उसे भोजन से वंचित नहीं किया जाता। इस व्यवस्था का उद्देश्य सहायता के साथ लाभार्थियों के सम्मान और आत्मसम्मान को बनाए रखना है।