वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
कानपुर। कर वसूली और जमीनों के पंजीकरण में लापरवाही से कानपुर में सरकारी खजाने को 2.46 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की वर्ष 2022-23 की अनुपालन लेखा परीक्षा रिपोर्ट में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) कार्यालय और उप-निबंधक कार्यालयों की कार्यप्रणाली में गंभीर चूक सामने आई है। रिपोर्ट संख्या 13 वर्ष 2025 को पांच अगस्त को जारी किया गया।
कैग की जांच में कानपुर नगर के आरटीओ कार्यालय के अभिलेखों की जांच के दौरान कानपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड की 84 जेएनएनयूआरएम बसों का मामला सामने आया। ये बसें दिसंबर 2019 से सितंबर 2022 के बीच कानपुर नगर निगम की निर्धारित सीमा से बाहर विभिन्न मार्गों पर संचालित होती रहीं। उत्तर प्रदेश मोटर वाहन कराधान अधिनियम के तहत नगर निगम सीमा से बाहर चलने वाली राज्य परिवहन उपक्रमों की बसों पर अतिरिक्त कर देय है। रिपोर्ट के अनुसार आरटीओ कार्यालय ने इन बसों के रूट चार्ट की समय पर जांच नहीं की। इसके चलते 84 बसों पर देय 1.38 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर वसूल नहीं किया जा सका। कैग ने इसे राजस्व वसूली की निगरानी में गंभीर कमी माना है।
जमीनों की रजिस्ट्री में भी सामने आई गड़बड़ी
कैग ने कानपुर के सदर प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ उप-निबंधक कार्यालयों के अभिलेखों की जांच में जमीनों के मूल्यांकन और पंजीकरण में भी अनियमितता पकड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक कई मामलों में मुख्य मार्ग से जमीन की वास्तविक दूरी, आवासीय गतिविधियों और गाटा संख्या से संबंधित वास्तविक स्थिति को दस्तावेजों में सही तरीके से प्रदर्शित नहीं किया गया। इसके आधार पर जमीनों का पंजीकरण कृषि दरों पर कराया गया। इससे स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क की 1.08 करोड़ रुपये की कम वसूली हुई। कैग के अनुसार भू-स्वामियों द्वारा तथ्यों को छिपाए जाने के बावजूद संबंधित स्तर पर पर्याप्त जांच नहीं की गई।
बसों के अतिरिक्त कर की 1.38 करोड़ और जमीनों के पंजीकरण से जुड़े शुल्क की 1.08 करोड़ रुपये की कमी को मिलाकर कुल राजस्व हानि 2.46 करोड़ रुपये आंकी गई है। कैग ने भविष्य में ऐसी चूकों को रोकने के लिए दस्तावेजों की प्रभावी जांच, नियमित निगरानी और राजस्व वसूली की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया है।