– 1997 में मिला था बसपा को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अक्टूबर में होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का उच्च सदन में भी प्रतिनिधित्व खत्म हो सकता है। बसपा के राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। प्रदेश विधानसभा में पार्टी का कोई विधायक नहीं है, ऐसे में मौजूदा चुनावी गणित में बसपा के लिए अपना प्रत्याशी निर्वाचित करा पाना संभव नहीं दिख रहा है।
निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान कराने का कार्यक्रम घोषित किया है। इन सीटों के लिए अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी और छह अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख है। सात अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि नौ अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। मतदान के बाद उसी दिन शाम पांच बजे मतगणना होगी।
वर्तमान विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 है और एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यूपी की 10 रिक्त होने वाली सीटों में आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास है। रामजी गौतम के कार्यकाल के बाद बसपा की राज्यसभा में मौजूदगी समाप्त हो सकती है। पार्टी के पास लोकसभा में भी कोई सदस्य नहीं है। बसपा का राजनीतिक आधार पिछले कुछ चुनावों में कमजोर हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सपा के साथ गठबंधन में 10 सीटें जीती थीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बलिया की रसड़ा सीट से उमाशंकर सिंह बसपा के एकमात्र विधायक चुने गए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी। अगस्त 2026 में उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में भी बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया।
बसपा को 1997 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था। निर्वाचन आयोग के 2025 के दस्तावेज में भी बसपा राष्ट्रीय पार्टी के रूप में दर्ज है। हालांकि राज्यसभा और विधानसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होने के बाद आगामी चुनावों में उसका राष्ट्रीय दल का दर्जा बनाए रखना भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।