वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
दिल्ली। साइबर ठगों ने पुलिस से बचने के लिए ठगी का नया तरीका अपनाया। उन्होंने किसी दफ्तर या निश्चित ठिकाने के बजाय अपनी SUV को ही मोबाइल कॉल सेंटर बना लिया। गाड़ी में बैठकर लोगों को फोन करते और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए लगातार लोकेशन बदलते रहते थे। दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही एक कथित साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड, छह चेकबुक, तीन पासबुक और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें पांच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी प्रतियां, हस्ताक्षर किया हुआ एक चेक और ग्राहकों की सूची वाले नौ पन्ने भी शामिल हैं। मामले का खुलासा मध्य प्रदेश के उमरिया निवासी नीलेश की शिकायत से हुआ। उन्होंने पुलिस को बताया कि बीमा पॉलिसियों में निवेश किए गए 45 लाख रुपये वापस दिलाने का भरोसा देकर उनसे रिफंड प्रक्रिया के नाम पर 65 हजार रुपये ठग लिए गए। शिकायत पर पूर्वी दिल्ली में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस को हिमांशु राठौर के बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन मिला। यह खाता नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा था। तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 37 वर्षीय लोकेश तोमर, हिमांशु राठौर और 35 वर्षीय तुषार के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, लोकेश नेटवर्क का संचालन और ठगी की रकम दूसरे लोगों के नाम पर खुले म्यूल बैंक खातों में भेजने का काम संभालता था। मुंबई और तेलंगाना में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से भी उसके संबंधों की जांच की जा रही है। पुलिस नेटवर्क के अन्य संपर्कों और बैंक खातों की पड़ताल कर रही है।