वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रों की भूख हड़ताल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने छात्रों की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए निष्कासन के आदेश वापस लेने और उनकी लंबित समस्याओं का जल्द समाधान करने की अपील की है।
ब्रिटास ने रविवार को राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा। सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी उन्होंने इस मामले को उठाया। उनके मुताबिक, छात्रों ने तीन अक्टूबर को अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी। सांसद ने कहा कि छात्रों की सेहत पर पड़ रहे असर को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्र सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
सांसद ने जेएनयू छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों के निष्कासन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय से बाहर करने से छात्रसंघ की भूमिका प्रभावित होती है और विद्यार्थियों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने में बाधा आती है। ब्रिटास ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) मैनुअल के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विरोध-प्रदर्शनों और सभाओं पर जुर्माने तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रावधान छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने लैंगिक न्याय, समान अवसर, दाखिले और कैंपस की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान की भी मांग की।
सांसद ने जेएनयू अधिनियम, 1966 का हवाला देते हुए राष्ट्रपति से अधिनियम की धारा आठ के तहत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने निष्कासन आदेश वापस लेने, विवादित नियमों की समीक्षा करने और छात्रों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।