वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा को पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में बड़ा झटका लगा है। इन तीन क्षेत्रों की छह सीटों में भाजपा महज दो सीटें ही जीत सकी, जबकि समाजवादी पार्टी ने चार सीटों पर कब्जा जमाया। नतीजों ने भाजपा के सहयोगी दलों निषाद पार्टी, अपना दल (एस) और सुभासपा की चुनावी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पारंपरिक चुनावों में जातिगत आधार पर प्रभाव का दावा करने वाले इन दलों का समर्थन शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच भाजपा के लिए निर्णायक साबित नहीं हुआ।
पूर्वांचल में भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। यहां की तीन सीटों में से भाजपा केवल गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट बचा सकी, जबकि वाराणसी की शिक्षक और स्नातक दोनों सीटें सपा के खाते में चली गईं। वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव और स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज की। इन नतीजों से भाजपा के सहयोगी ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल के प्रभाव वाले क्षेत्रों में वोट हस्तांतरण की क्षमता पर चर्चा तेज हो गई है।
अवध क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला मिला-जुला रहा। लखनऊ शिक्षक सीट पर भाजपा के उमेश द्विवेदी लगातार तीसरी बार जीतने में सफल रहे। हालांकि, लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह पटेल ने भाजपा प्रत्याशी को हराकर बड़ा उलटफेर किया। भाजपा के कुर्मी प्रत्याशी के सामने सपा की कुर्मी प्रत्याशी की जीत ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है।
बुंदेलखंड की इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त दी। इस हार ने गैर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच रोजगार, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे अहम रहे। नतीजों से संकेत मिलता है कि इन वर्गों में भाजपा को अपनी रणनीति और सहयोगी दलों के साथ समन्वय पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।