वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में सदस्य देशों ने जनकेंद्रित विकास, सतत विकास लक्ष्यों और समावेशी वैश्विक शासन को मजबूत करने के लिए संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित इस मंच की थीम ‘जनकेंद्रित विकास के लिए संसदों को बढ़ावा देना’ रही। इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मंच की घोषणा में ब्रिक्स देशों ने वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण’ का समर्थन किया। साथ ही 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी और नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन को अपनाए जाने का स्वागत किया। संसदीय प्रतिनिधियों ने राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक और जनस्तरीय आदान-प्रदान के तीन प्रमुख स्तंभों के तहत रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि संसदों के बीच संवाद आपसी विश्वास बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और साझा चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाता है। घोषणा में विकासशील देशों की आवाज वैश्विक मंचों पर बुलंद करने और अंतर-संसदीय संघ सहित विभिन्न मंचों पर ब्रिक्स सहयोग बढ़ाने की जरूरत भी रेखांकित की गई। प्रतिनिधियों ने डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल, संस्थागत लचीलेपन, समावेशी वैश्विक शासन और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे विषयों पर सामूहिक प्रयास तेज करने पर सहमति जताई।
ब्रिक्स देशों ने 2030 के सतत विकास एजेंडे को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए गरीबी उन्मूलन को वैश्विक प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि साझा प्रयासों, नवाचार और समन्वित नीतियों के जरिए समावेशी विकास को गति देना जरूरी है। साथ ही 2030 के बाद के वैश्विक सतत विकास एजेंडे को आकार देने में भी सहयोग जारी रखने पर जोर दिया।