– कानपुर में 411 करोड़ की 48 परियोजनाओं की सौगात, बिठूर को रामायण सर्किट से मिलेगी नई पहचान
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
कानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कानपुर के बिल्हौर और बिठूर विधानसभा क्षेत्रों को 411 करोड़ रुपये से अधिक की 48 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार विरासत के सम्मान, विकास और गरीब कल्याण के संकल्प के साथ काम कर रही है। बिठूर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को नया स्वरूप दिया जा रहा है। रामायण सर्किट के माध्यम से इसकी पहचान का विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि बिठूर धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि ने यहीं रामायण की रचना की और माता सीता को आश्रय मिला था। लव-कुश का बाल्यकाल भी इसी भूमि से जुड़ा है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि और तात्या टोपे की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए। साथ ही वाल्मीकि रामायण पाठ में शामिल होकर सीता कुटिया और प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन सिखाता है कि मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है। रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की यात्रा आत्मपरिवर्तन, साधना और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल है। रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि पारिवारिक दायित्व, भाईचारे और सुशासन का मार्गदर्शन करने वाला महाकाव्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हजारों मठ-मंदिरों में अखंड रामायण पाठ की परंपरा श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रही है।
योगी ने कहा कि कानपुर में मेट्रो रेल की सुविधा उपलब्ध है। हवाई अड्डे की सुविधा को आगे बढ़ाया गया है और कानपुर को लखनऊ से जोड़ने के लिए नए एक्सप्रेस-वे की सुविधा उपलब्ध हुई है। गंगा नदी पर ट्रांस गंगा क्षेत्र में नए पुल के निर्माण को मंजूरी देकर काम आगे बढ़ाया गया है। कानपुर बाईपास का निर्माण भी हो रहा है।
उन्होंने कहा कि बिठूर में घाटों के विकास और महर्षि वाल्मीकि आश्रम के सुंदरीकरण पर काम किया जा रहा है। रामायण सर्किट के तहत घाटों, होमस्टे और हस्तशिल्प को नई पहचान देने का प्रयास है। इससे पर्यटन के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बिठूर महोत्सव के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और क्रांतिकारी विरासत को व्यापक पहचान मिल रही है।