वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध, नवाचार और औद्योगिक विकास को नई गति देने की तैयारी है। योगी सरकार प्रदेश में राज्य स्तरीय बायोई-3 सेल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके जरिए प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकों को उद्योगों तक पहुंचाने, स्वदेशी नवाचारों को बाजार उपलब्ध कराने और स्टार्टअप के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा। इस पहल में सीएसआईआर, आईआईटी और अन्य प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ अहम भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश प्रोमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) ने विशेषज्ञों की कमेटी गठित की है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों, शिक्षण संगठनों और उद्योग जगत के बीच तालमेल बढ़ाकर शोध को व्यावसायिक उपयोग से जोड़ना है। यह पहल केंद्र सरकार की बायोई-3 नीति के अनुरूप है, जिसमें अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार को ध्यान में रखकर जैव प्रौद्योगिकी आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जाता है।
यूपीपीपीसी की सीईओ कृतिका शर्मा के मुताबिक, कमेटी में सीएसआईआर की प्रमुख प्रयोगशालाओं, आईआईटी, नाइपर रायबरेली और सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (CBMR), लखनऊ के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। पैनल के संयोजक यूपीपीपीसी के महाप्रबंधक (अनुसंधान एवं नवाचार) प्रो. डॉ. संदीप शर्मा हैं। कमेटी में दवा अनुसंधान, विष विज्ञान, औषधीय एवं सुगंधित पौधों और जैव चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी गई है।
काउंसिल के निदेशक डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि बायोई-3 के तहत प्राथमिकता वाले कार्यक्रम तय करने के लिए केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
इस पहल से नई तकनीकों के व्यावसायिक इस्तेमाल, जैव विनिर्माण में निवेश और कुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही प्रदेश में स्वदेशी तकनीकों पर आधारित नए उद्यमों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।