वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
कानपुर। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। इस दौरान प्राचीन शिवलिंग पर पूजन करने के साथ सीता कुटिया और आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन पीलू के वृक्ष के भी दर्शन किए। गुरुकुल के सात बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय माहौल में नजर आया।
मुख्यमंत्री के आश्रम पहुंचने पर दो महंतों ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। उन्होंने आश्रम में स्थित प्राचीन शिवलिंग की पूजा की। धार्मिक मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि इस शिवलिंग की आराधना करते थे। इसके बाद मुख्यमंत्री सीता कुटिया पहुंचे और दर्शन किए। उन्होंने आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन पीलू के वृक्ष के भी दर्शन किए। मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि इस वृक्ष के नीचे बैठकर जाप और तपस्या किया करते थे।
बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम का रामायण परंपरा में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि और माता सीता के आश्रय से जुड़ा है। मान्यता है कि वनवास के दौरान माता सीता ने यहां आश्रय लिया था और लव-कुश का जन्म भी इसी स्थान पर हुआ था। महर्षि वाल्मीकि से जुड़े प्रसंगों के कारण यह आश्रम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
आश्रम में पूजा-अर्चना और धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री नानाराव पेशवा पार्क पहुंचे। यहां आयोजित जनसभा में उन्होंने क्षेत्र में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के जरिए धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े स्थलों का महत्व भी सामने आया।