वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। टीजीटी-पीजीटी भर्ती की नई नियमावली में विसंगतियों को दूर करने और वंचित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नई नियमावली के प्रावधानों के कारण करीब छह से सात लाख योग्य अभ्यर्थी आवेदन और भर्ती प्रक्रिया से वंचित हो रहे हैं।
ज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता, विषयगत अर्हता, आरक्षण, टीईटी, बीएड और नॉन-बीएड अभ्यर्थियों के साथ कला विषयों से संबंधित विसंगतियों का उल्लेख किया गया। अभ्यर्थियों ने राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों के स्नातक के समतुल्य एकल विषय प्रमाणपत्र कार्यक्रमों को मान्यता देने की मांग की, ताकि संबंधित अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पुरानी नियमावली के तहत पात्र रहे, लेकिन नए नियमों के कारण भर्ती से बाहर हुए अभ्यर्थियों को विशेष अवसर दिया जाना चाहिए। इसके लिए आवश्यक शासनादेश जारी करने की मांग भी की गई। अभ्यर्थियों ने ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और अनारक्षित वर्ग के पदों का विषयवार और श्रेणीवार विवरण सार्वजनिक करने पर जोर दिया, ताकि आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
ज्ञापन में बीएड में प्रवेश और भर्ती की शैक्षणिक अर्हता में समानता सुनिश्चित करने, आरक्षित वर्गों को नियमानुसार अंकों में छूट देने तथा टीजीटी भर्ती में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई। साथ ही नॉन-बीएड अभ्यर्थियों, बीएफए-एमएफए धारकों और प्राविधिक कला विषयों के अभ्यर्थियों की पात्रता की समीक्षा करने को कहा गया। अभ्यर्थियों ने क्षैतिज आरक्षण को पुरानी नियमावली के अनुसार लागू करने, टीजीटी के कार्यक्षेत्र में बदलाव के प्रभाव की समीक्षा और नियमित भर्ती सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने अखिलेश यादव से इन मुद्दों को विधानसभा और शासन स्तर पर उठाकर वंचित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की पहल करने का आग्रह किया।
ज्ञापन देने वालों में कौशल कुमार विश्वकर्मा, आनंद कुमार, सालू यादव, प्रदीप गुप्ता, किरन चौहान, सुनील यादव, चन्द्रजीत यादव, रामसेवक बिंद, अमित चौधरी, सुभाष पाल और मंजू मौर्य सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल रहे।