वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा छह सीटें जीतकर अपना पुराना प्रदर्शन बरकरार रखने में सफल रही, लेकिन आगरा और लखनऊ में समाजवादी पार्टी की जीत ने उसकी चिंता बढ़ा दी है। सपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी ताकत दिखाई है। खासकर भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में मिली हार ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी संकेत दिए हैं।
शिक्षक कोटे की छह सीटों में भाजपा को चार और सपा को दो सीटें मिली हैं। वहीं, स्नातक कोटे की पांच सीटों में भाजपा ने दो और सपा ने तीन सीटें जीती हैं। इस तरह दोनों दलों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। भाजपा ने मेरठ की शिक्षक और स्नातक सीटों के साथ बरेली-मुरादाबाद शिक्षक, लखनऊ शिक्षक, आगरा स्नातक और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की।
सपा ने लखनऊ की स्नातक सीट पर कांति सिंह पटेल और आगरा की शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत से भाजपा को बड़ा झटका दिया। इसके अलावा झांसी की स्नातक सीट पर डॉ. मान सिंह यादव और वाराणसी-मिर्जापुर की शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की। वाराणसी की स्नातक सीट पर भी सपा ने बढ़त बनाई।
आगरा में आकाश अग्रवाल की जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि वह पहले भाजपा से जुड़े रहे थे। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने सपा का दामन थाम लिया और जीत हासिल की। लखनऊ स्नातक सीट पर भी भाजपा को अपनी सीट गंवानी पड़ी।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने चुनाव परिणामों की समीक्षा करने की बात कही है। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने विजयी प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। सपा ने इस प्रदर्शन को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से अहम बताया है।