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एसटीएफ जांच में KGMU के प्रोफेसरों की भूमिका पर सवाल, कार्रवाई के निर्देश

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों के उत्पीड़न का मामला अब संस्थान के कई प्रोफेसरों, डॉक्टरों और कर्मचारियों तक पहुंच गया है। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में महिला डॉक्टरों पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने, ब्लैकमेलिंग, मानसिक उत्पीड़न और शिकायतों को दबाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाबू और एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमायरा कयूम की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने केजीएमयू प्रशासन को चिह्नित डॉक्टरों, शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 30 अक्टूबर 2026 को संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने इस संबंध में केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजा। शासन ने कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।
एसटीएफ ने जांच के लिए दो एफआईआर को आधार बनाया। पहली एफआईआर 23 दिसंबर 2025 को पैथोलॉजी विभाग की रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. देवारती मित्रा की शिकायत पर डॉ. रमीज मलिक के खिलाफ दर्ज हुई थी। दूसरी एफआईआर 29 दिसंबर को नर्सिंग स्टाफ माविया की शिकायत पर रेजिडेंट डॉक्टर मोहम्मद आदिल के खिलाफ दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में डॉ. रमीज पर डॉ. देवारती मित्रा समेत कई महिला डॉक्टरों को प्रेमजाल में फंसाने और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। इनमें डॉ. मानसी सक्सेना, डॉ. कृतिका पाण्डेय और डॉ. मुस्कान के नाम भी शामिल हैं। डॉ. रमीज को नौ जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसटीएफ ने माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी और गांधी वार्ड से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया है। माइक्रोबायोलॉजी की संविदा कर्मचारी ज्योति राव की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने और उनकी संविदा समाप्त किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं रेडियोलॉजी के एक रेजिडेंट डॉक्टर पर ब्लैकमेलिंग और परीक्षा में फेल कराने की धमकी देने के आरोप हैं। रिपोर्ट में केजीएमयू के कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की सिफारिश की गई है। इसमें इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह और कुछ मेडिकल छात्रों के कथित नेटवर्क का भी जिक्र है। एसटीएफ के मुताबिक, केजीएमयू की विशाखा कमेटी ने भी डॉ. रमीज को संबंधित आरोपों में दोषी पाया था। अब शासन के निर्देश के बाद संस्थान प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर है।

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