वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में 10 दिवसीय राष्ट्रीय गांधी शिल्प बाजार सजाया गया है। शनिवार को प्रदेश के सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों ने करीब 200 स्टॉल लगाए हैं। उद्घाटन समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आठ हस्तशिल्पियों को सम्मानित भी किया गया। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय की ओर से प्रायोजित और उत्तर प्रदेश राज्य कृषि एवं ग्रामीण विकास निगम लिमिटेड की ओर से आयोजित यह प्रदर्शनी 26 अक्टूबर से चार नवंबर तक चलेगी।
इस मौके पर जेपीएस राठौर ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के लिए स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित कर रही है। गांधी शिल्प बाजार जैसे आयोजन कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करते हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और शिल्पकारों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिलता है। प्रदर्शनी में जन शिक्षण संस्थान कानपुर देहात और लखनऊ के प्रशिक्षित लाभार्थियों के उत्पाद विशेष आकर्षण बने हुए हैं। इनमें लखनवी चिकनकारी के परिधान, जूट और पेपर बैग, सुगंधित मोमबत्तियां, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और सॉफ्ट टॉयज शामिल हैं। करवाचौथ की पूर्व संध्या पर महिला लाभार्थियों ने मेहंदी कला का प्रदर्शन भी किया।
मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर शिल्पकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने आठ उत्कृष्ट हस्तशिल्पियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। आयोजन में युवाओं के लिए सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं भी हो रही हैं। इस दौरान निगम के अध्यक्ष नवलेश प्रताप सिंह, प्रबंध निदेशक अब्बास, सहायक निदेशक रजा आलम और रवि कुमार गौड़ सहित कई अधिकारी, शिल्पकार और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।