वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से पैसे मांगे गए तो ऐसा करने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा। किसी शिक्षक को ज्वाइनिंग में परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी प्रबंधक को कोई समस्या है तो शासन को बताए, लेकिन नियुक्ति के बाद पैसे मांगने की शिकायत मिली तो कठोर कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3,567 प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह केवल नियुक्ति पत्र देने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को 3,567 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। पिछले एक सप्ताह में 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिल चुके हैं। नौ वर्षों में करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। बिना नाम लिए सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, सैफई सिंडिकेट गिनता जाए, हम नौकरी देते जाएंगे।
योगी ने कहा कि शिक्षा सेवा चयन आयोग का उद्देश्य नकल माफिया पर अंकुश लगाना और प्रतिभावान युवाओं को उनका अधिकार दिलाना है। उन्होंने प्रयागराज में धरना दे रहे युवाओं के संबंध में एनसीटीई को पत्र भेजकर एक बार राहत देने या निश्चित अवधि बाद प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई और गूगल जानकारी दे सकते हैं, लेकिन सही-गलत की पहचान शिक्षक ही कराएगा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विद्यादान को सबसे बड़ा कार्य बताया, जबकि माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि पहले योग्य अभ्यर्थी चयन से वंचित रह जाते थे और जाति के आधार पर चयन होता था।