वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राष्ट्रीय गतिशील दिव्यांगजन संस्थान और वैभव प्रकाश विशेष प्रशिक्षण केंद्र, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं दिव्यांगजन’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित हुआ। सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को दिव्यांगजनों के समावेशन, सशक्तीकरण और समग्र विकास से जोड़ने पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्रीय गतिशील दिव्यांगजन संस्थान के निदेशक डॉ. ललित नारायण और वैभव प्रकाश विशेष प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक पीके अग्रवाल ने किया। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन डॉ. हिमांशु शेखर झा और विशिष्ट अतिथि लेबर एन्फोर्समेंट ऑफिसर, कानपुर आदर्श कुमार रहे। आयोजन के समन्वय में डॉ. राजीव वर्मा, सूर्य प्रकाश मिश्रा और डॉ. नीलम बंसल की भूमिका रही।
डॉ. हिमांशु शेखर झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में मानवीय गरिमा, करुणा, समानता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन जैसे मूल्यों को महत्व दिया गया है। इन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा और पुनर्वास व्यवस्था से जोड़कर दिव्यांगजनों के लिए अधिक समावेशी वातावरण बनाया जा सकता है। उन्होंने दिव्यांगजनों की प्रतिभा और क्षमताओं को पहचानकर उन्हें राष्ट्र निर्माण में समान अवसर देने पर जोर दिया।
आदर्श कुमार ने भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान-तकनीक के समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सहायक तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में योग, कला, संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और जीवन-कौशल की उपयोगिता पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने समावेशी शिक्षा, पुनर्वास, कौशल विकास और दिव्यांगजन अधिकारों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर विचार रखे। पेपर प्रेजेंटेशन और पैनल डिस्कशन में शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने सहभागिता की। समापन पर पीके अग्रवाल ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।