वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत परिचालकों को अब सीधे निगम से अनुबंध के आधार पर रखने की प्रक्रिया शुरू होगी। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रथम चरण में वर्तमान में आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत परिचालकों को ही इसका लाभ दिया जाएगा। इसके लिए सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
मंत्री ने बताया कि कदाचार, भ्रष्टाचार या अन्य किसी कारण से एजेंसी को वापस न किए गए और वर्तमान में आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत परिचालकों को ही सीधे अनुबंध पर रखने की पात्रता होगी। चयनित परिचालकों को नई प्रतिभूति राशि (सिक्योरिटी मनी) जमा करनी होगी। आउटसोर्स अवधि में की गई सेवा का कोई लाभ सीधे अनुबंध में नहीं मिलेगा, हालांकि निगम में प्रचलित अन्य सभी सेवाएं अनुमन्य होंगी। जिन सेवा प्रदाताओं की अनुबंध अवधि 31 अक्टूबर 2026 को पूरी हो रही है, उनके माध्यम से कार्यरत परिचालकों से एक नवंबर 2026 से संविदा परिचालक के रूप में संचालन कार्य लिया जाएगा। वहीं 31 जनवरी 2027 को अवधि पूरी होने वाले सेवा प्रदाताओं के परिचालकों से एक फरवरी 2027 से संविदा पर कार्य लिया जाएगा।
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन. सिंह ने बताया कि सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। समायोजित होने वाले परिचालकों के वेतन, ईपीएफ, ईएसआई और जीएसटी समेत सभी देयकों का समय से भुगतान कराना होगा। सेवा प्रदाता की प्रतिभूति लौटाने के बाद एनओसी और अदेयता प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद परफार्मेंस सिक्योरिटी, बैंक गारंटी या एफडीआर लौटाई जाएगी। परिचालकों को आउटसोर्स अवधि के वैधानिक देयकों के संबंध में कोई बकाया न होने का शपथपत्र भी देना होगा।