वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग की उत्तर प्रदेश पूर्व लाइसेंस सेवा क्षेत्र इकाई ने मोबाइल टावरों से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (ईएमएफ) रेडिएशन को लेकर फैली भ्रांतियों पर स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी जारी की है। विभाग ने कहा है कि 2G, 3G, 4G और 5G सहित सभी मोबाइल नेटवर्क से उत्सर्जित तरंगें निर्धारित सुरक्षा मानकों के भीतर होती हैं और इनसे आम जनता के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
विभाग के अनुसार, सभी मोबाइल तकनीकें नॉन-आयनाइजिंग रेडियो फ्रीक्वेंसी पर आधारित होती हैं, जिनकी ऊर्जा बहुत कम होती है। यह ऊर्जा मानव शरीर या डीएनए को नुकसान पहुंचाने में सक्षम नहीं होती। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। भारत में लागू ईएमएफ मानक अंतरराष्ट्रीय संस्था ICNIRP के मानकों से भी अधिक सख्त हैं, जिससे नागरिकों की सुरक्षा और मजबूत होती है।
उत्तर प्रदेश पूर्व एलएसए द्वारा क्षेत्र में स्थापित सभी मोबाइल टावरों की नियमित निगरानी की जाती है। सेवा प्रदाताओं से स्व-प्रमाणन लिया जाता है और विभाग हर वर्ष कुल टावरों के लगभग 5 प्रतिशत का औचक निरीक्षण करता है। वर्ष 2025-26 में कुल 1,21,866 बेस ट्रांससीवर स्टेशनों में से 6,240 का परीक्षण किया गया, जिसमें सभी सुरक्षित पाए गए।
मानकों का उल्लंघन करने पर संबंधित कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है और टावर को बंद करने का प्रावधान भी है। अपर महानिदेशक दूरसंचार अरुण कुमार वर्मा ने कहा कि विभाग पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ काम कर रहा है तथा सभी टावर तय मानकों पर खरे उतर रहे हैं।
नागरिकों की सुविधा के लिए ‘तरंग संचार’ पोर्टल भी उपलब्ध है, जहां टावरों की जानकारी और ईएमएफ अनुपालन की स्थिति देखी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर कोई भी व्यक्ति मामूली शुल्क देकर टावर की जांच का अनुरोध कर सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें।