वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
प्रयागराज। साउथ मलाका के चर्चित वैश्य परिवार सामूहिक हत्याकांड में पुलिस को नए सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। मुख्य आरोपी शनि गुप्ता की गिरफ्तारी और हत्या की गुत्थी सुलझाने के दावे के बावजूद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इस सनसनीखेज वारदात में कोई अन्य व्यक्ति भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल तो नहीं था।
हत्याकांड के पांचवें दिन इलाके का जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा। घटना के बाद कई दिनों से बंद पड़ी बाजार की अधिकांश दुकानें शनिवार को खुल गईं। हालांकि स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच अब भी इस हत्याकांड की चर्चा बनी हुई है। लोग सील किए गए मकान के बाहर रुककर घटना की जानकारी लेते दिखाई दिए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस दर्दनाक घटना की यादें लंबे समय तक लोगों के मन से नहीं मिटेंगी।
उधर पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी शनि गुप्ता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और डिजिटल डेटा की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच में कई ऐसे मोबाइल नंबर सामने आए हैं, जिनसे घटना से पहले और बाद में लगातार बातचीत हुई थी। पुलिस अब इन नंबरों की पहचान कर उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ भी की जाएगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मोबाइल से डिलीट किए गए मैसेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी रिकवर कराया जा रहा है। कुछ नंबरों पर वारदात से पहले लगातार संपर्क होने की जानकारी मिलने के बाद जांच एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं।
गौरतलब है कि पुलिस के अनुसार कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य, उनकी पत्नी अनीता, बेटी मीनाक्षी और बेटे अभिषेक की हत्या की साजिश अभिषेक और उसके दोस्त शनि गुप्ता ने मिलकर रची थी। पुलिस का दावा है कि लूट के इरादे से परिवार के तीन सदस्यों की हत्या करने के बाद डेढ़ करोड़ रुपये के जेवरों के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में शनि ने अभिषेक की भी हत्या कर दी थी। अब कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों से मिले नए संकेतों के बाद पुलिस यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि इस जघन्य वारदात के पीछे कोई और चेहरा तो नहीं छिपा है।