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सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले ठगी का जाल, टेलीग्राम पर 8 हजार में पेपर बेचने का दावा; जांच तेज

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा से पहले पेपर लीक के नाम पर अभ्यर्थियों को ठगने की कोशिश का मामला सामने आया है। टेलीग्राम पर बनाए गए एक चैनल के जरिए कथित तौर पर परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सख्त रुख अपनाते हुए हुसैनगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है और जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार टेलीग्राम पर “यूपीपी एग्जाम पेपर” नाम से संचालित चैनल पर पुलिस भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र मात्र आठ हजार रुपये में उपलब्ध कराने का झांसा दिया जा रहा था। इसके लिए एक क्यूआर कोड और बैंक खाते का विवरण भी साझा किया गया था। भर्ती बोर्ड के सतर्कता प्रकोष्ठ में तैनात इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। जांच की जिम्मेदारी डिप्टी पुलिस अधीक्षक विकास कुमार जायसवाल को सौंपी गई है। पुलिस चैनल संचालक और संबंधित बैंक खाते के बारे में जानकारी जुटा रही है।
उधर, उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 8, 9 और 10 जून को होने वाली परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संबंधित जिलों के स्ट्रांग रूम में पहुंचा दिए गए हैं। प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया की निगरानी नामित नोडल अधिकारियों की देखरेख में की जा रही है।
परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए एसटीएफ, साइबर सेल और जिला पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। लाखों अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना को देखते हुए परीक्षा केंद्रों, स्ट्रांग रूम और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और नकल माफिया पर कार्रवाई के लिए विशेष टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम, व्हाट्सएप, फेसबुक और अन्य डिजिटल माध्यमों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या फर्जी प्रश्नपत्र के झांसे में न आएं और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। भर्ती बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रामक सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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