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​”हिन्दू धर्म की चंदन की लकड़ी में दीमक लग गई, अब नरमी नहीं कड़ाई का समय : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

– ​”श्री राम के दरबार में चोरी हुई और सारा सरकारी प्रायश्चित प्रायश्चित नहीं”
– ​”वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर अयोध्या का नया न्यास (बने)”
– मूल मन्त्र : “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ”
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
अयोध्या। उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय ‘गौ-गोष्ठी (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ यात्रा के तहत शनिवार को अयोध्या में विशाल जनसभा आयोजित हुई। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर उनका स्वागत किया गया। सभा में मौजूद लोगों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए गौ संरक्षण का संकल्प लिया।
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि पूर्वजों ने हिंदू धर्म की वेदी चंदन की लकड़ी से बनाई थी, लेकिन अब उसमें दीमक लग गई है। उन्होंने इसे संगठन और व्यवस्था में आई कमजोरियों का प्रतीक बताते हुए कहा कि गलत लोगों पर दिखाई गई नरमी ही नमी बन गई, जिससे व्यवस्था भीतर से खोखली होती चली गई। अब समय आ गया है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और धर्म के नाम पर काम करने वालों की जवाबदेही तय हो।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है और सरकार को भी आधिकारिक अभिलेखों में गौ माता को उसी सम्मान के साथ दर्ज करना चाहिए। उनका कहना था कि जो राजनीतिक दल गौ माता को उचित सम्मान देगा, जनता का समर्थन उसी को मिलना चाहिए। उन्होंने लोगों से गौ संरक्षण के मुद्दे पर सजग होकर मतदान करने की अपील भी की।
शंकराचार्य ने राम मंदिर निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी संस्था या धार्मिक कार्य में गड़बड़ी होने पर जिम्मेदार लोगों को नैतिक उत्तरदायित्व स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रायश्चित केवल धार्मिक अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि गलती स्वीकार करने और उसके सुधार से पूरा होता है। सभा में बड़ी संख्या में संत, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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