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राम मंदिर में बड़ा बदलाव, वीआईपी पास पर रोक, बिना जेब वाली वर्दी पहन होंगी गणना, सुरक्षा और दान व्यवस्था हुई सख्त

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सुरक्षा और दान प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। इसी क्रम में फिलहाल वीआईपी पास जारी करने की प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से रोक दी गई है। ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी के अनुसार जिन अधिकारियों की आईडी के माध्यम से वीआईपी पास जारी किए जाते थे, उनके इस्तीफा देने के कारण यह व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि ट्रस्ट के ट्रस्टी दिनेन्द्र दास के पास आवश्यक प्रशासनिक अधिकार मौजूद हैं।
ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी ने बताया कि पहले वीआईपी पास जारी करने की कोई निर्धारित सीमा नहीं थी और आवश्यकता के अनुसार बड़ी संख्या में पास जारी किए जाते थे। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने इस्तीफा दिया है, उनके इस्तीफों को अभी तक ट्रस्ट की बैठक में औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में तकनीकी रूप से उनके अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन फिलहाल वे सक्रिय रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं।
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने दान पेटियों की सुरक्षा और गणना प्रक्रिया को पूरी तरह नए सिरे से व्यवस्थित किया है। गणनास्थल पर निगरानी के लिए 13 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि दान पेटियों को मंदिर परिसर से गणना केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए 27 अतिरिक्त एसआईएस सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। अब गणना केंद्र पर केवल 43 अधिकृत लोगों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। दान पेटियों के मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल भी तैनात किया गया है और पिलर संख्या-34 स्थित गुप्त दान पेटी के पास अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
ट्रस्ट ने बैंकिंग व्यवस्था में भी बदलाव किया है। अब बैंक संबंधी किसी भी लेनदेन के लिए अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, मुख्य अभियंता जगदीश आफले और चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय के संयुक्त हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। वहीं, दान राशि की गणना करने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली निर्धारित वर्दी पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और पूरी गणना प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जा रही है। नव नियुक्त एसपी सुरक्षा विजय शंकर मिश्रा ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल ली है। ट्रस्ट का कहना है कि इन बदलावों के बावजूद श्रद्धालुओं के दान में कोई कमी नहीं आई है और अधिकांश श्रद्धालु अब रसीद के साथ ट्रस्ट कार्यालय अथवा डोनेशन काउंटर पर दान देना पसंद कर रहे हैं।

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