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जगद्गुरु शंकराचार्य का रामपुर में भव्य स्वागत, गोसंरक्षण को लेकर सरकारों पर उठाए सवाल

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
रामपुर। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ यात्रा के तहत रविवार को उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रामपुर जनपद में विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” के साथ गोसंरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वे किसी राजनीतिक दल की ओर से नहीं, बल्कि गोमाता के पक्ष में अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक गाय सुरक्षित रहेगी, तब तक धर्म और संस्कृति भी सुरक्षित रहेंगे। उनके अनुसार, हर हिंदू परिवार में पहली रोटी गाय के लिए निकाली जाती है, इसलिए गोमाता समाज की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता जिस उद्देश्य से मतदान करती है, उसके विपरीत कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि गोसंरक्षण के क्षेत्र में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने जहां पहले से गोसंरक्षण कानून नहीं थे, वहां नए कानून नहीं बनाए और जम्मू-कश्मीर में पहले से लागू गोसंरक्षण संबंधी कानून को समाप्त कर दिया।
शंकराचार्य ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में प्रतिदिन लगभग 20 हजार गायों के वध की बात कही जाती थी, जबकि वर्तमान में यह संख्या 80 हजार प्रतिदिन तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में गायों की संख्या में संकर नस्लों को शामिल कर आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं, जबकि शुद्ध देशी गायों की संख्या लगातार घट रही है। उनके अनुसार, यदि यही स्थिति बनी रही तो कृषि, पर्यावरण और भारतीय संस्कृति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने महाराष्ट्र में गाय को राज्य माता घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि गोमांस के सामान्यीकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो भारतीय परंपरा के विपरीत है। सभा के अंत में शंकराचार्य ने उपस्थित लोगों से गोसंरक्षण के प्रति जागरूक रहने और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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