वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही जांच के बीच एक नया दावा सामने आने से मामला और चर्चा में आ गया है। पूर्व आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेंट की गई करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्णमंडित रामचरितमानस अब मंदिर परिसर में दिखाई नहीं दे रही है। उनके इस दावे के बाद मंदिर में दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।
पूर्व आईएएस अधिकारी के अनुसार उनके परिवार ने अप्रैल 2024 में सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को समर्पित की थी। उनका कहना है कि प्रारंभिक दिनों में इस विशेष रामचरितमानस को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में रखा गया था, लेकिन कुछ समय बाद इसे वहां से हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार ट्रस्ट से जानकारी मांगी, हालांकि उन्हें अब तक इसकी वर्तमान स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
लक्ष्मीनारायणन का कहना है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन्हें बताया था कि मंदिर में प्राप्त सभी भेंट और उपहारों को स्थायी रूप से प्रदर्शित करना संभव नहीं है। सुरक्षा और स्थान की सीमाओं को देखते हुए अनेक मूल्यवान वस्तुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाता है, इसलिए प्रत्येक दान की गई सामग्री मंदिर परिसर में हमेशा प्रदर्शित नहीं की जा सकती।
गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला सात जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर भी दर्ज की गई। सूत्रों के अनुसार एसआईटी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं कथित रूप से गायब बताए जा रहे सोने के आभूषणों को पिघलाकर उनकी पहचान मिटाने का प्रयास तो नहीं किया गया। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।
पूर्व आईएएस अधिकारी के दावे के बाद मंदिर में चढ़ावे के संरक्षण, रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस विशेष दावे पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्वर्णमंडित रामचरितमानस सुरक्षित रूप से संरक्षित है या पूर्व अधिकारी के दावों में कितना तथ्य है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।