वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखीमपुर खीरी। थाना निघासन क्षेत्र के ग्राम तारानगर में पांच फरवरी 2026 को मां-बेटे पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीड़िता ज्ञान देवी ने आरोप लगाया है कि प्राथमिकी में नामजद दोनों आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि घटना से असंबंधित एक निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों की गिरफ्तारी और परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
ज्ञान देवी के अनुसार, पांच फरवरी की रात करीब 1:45 बजे वह अपने पुत्र के साथ घर के बाहर सो रही थीं। इसी दौरान दो लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में उनके पुत्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वह स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गईं। शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंचे तो हमलावर फरार हो गए। घायल पुत्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निघासन ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने थाने में दी गई तहरीर में परिवार के ही हरेराम और सियाराम को नामजद करते हुए दावा किया था कि उन्होंने दोनों को घटना को अंजाम देते देखा है। उनके अनुसार, पुलिस ने शुरुआत में दोनों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में छोड़ दिया। इसके बाद उनके देवर रामचंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि परिवार का दावा है कि घटना के समय वह कर्नाटक में मजदूरी कर रहे थे।
परिजनों का आरोप है कि जेल में मुलाकात के दौरान रामचंद्र ने पुलिस द्वारा मारपीट और बयान बदलने का दबाव बनाए जाने की बात कही। परिवार का यह भी दावा है कि बरामद दिखाए गए चाकू के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। ज्ञान देवी ने आरोप लगाया कि नामजद आरोपी लगातार उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, जिससे परिवार दहशत में है।
पीड़िता ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, पुलिस महानिदेशक, उप पुलिस महानिरीक्षक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्रार्थना-पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच, नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
उधर, पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों पर पुलिस का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पुलिस का आधिकारिक पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।