वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। विद्युत मजदूर संगठन उत्तर प्रदेश की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को संगठन भवन, हम्बरा अपार्टमेंट, श्यामा चौराहा में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष विमलचंद पांडे ने की। इसमें कर्मचारियों की लंबित समस्याओं, वेतन विसंगति, पदोन्नति, स्थानांतरण नीति और संविदा कर्मियों के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
संगठन के मुख्य महामंत्री श्रीचन्द्र ने कहा कि कार्यकारी सहायक, टीजी-2 और समकक्ष कर्मचारियों की वेतन विसंगति वर्षों बाद भी दूर नहीं हो सकी है। समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानांतरण नीति की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों का जिलों से बाहर तबादला किया गया है। वहीं वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर बड़े पैमाने पर पदों में कटौती और हजारों संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है और फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के आक्रोश व मारपीट जैसी घटनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में मृतक आश्रितों की नियुक्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति समाप्त होने से कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इसके अलावा चयनित अवर अभियंताओं की वरिष्ठता सूची अब तक जारी नहीं किए जाने और 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को प्रथम एसीपी का लाभ नहीं मिलने पर भी नाराजगी जताई गई।
अध्यक्ष विमलचंद पांडे ने कहा कि सरकार ने संविदा कर्मियों के हित में सेवा निगम का गठन किया है, लेकिन ऊर्जा विभाग को अब तक इसमें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से ऊर्जा निगम को सेवा निगम में शामिल करने, वर्ष 2023 की हड़ताल के दौरान हटाए गए तथा वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर सेवामुक्त किए गए संविदा कर्मियों की बहाली और आंदोलन के दौरान हुए उत्पीड़न को समाप्त करने की मांग की। बैठक का संचालन प्रदेश प्रभारी आरसी पाल ने किया। इस दौरान संगठन के कई पदाधिकारियों और सदस्यों ने भी कर्मचारियों की समस्याओं पर अपने विचार रखे।