वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रही राजधानी लखनऊ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर में आज भी कई पुराने और कथित रूप से अनफिट टेंपो खुलेआम ओवरलोडिंग के साथ संचालित हो रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के बावजूद इन वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। विरोध करने पर चालकों द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
सबसे अधिक शिकायतें ट्रांस गोमती क्षेत्र के व्यस्त निशातगंज चौराहे से चौक और अमीनाबाद रूट पर चलने वाले टेंपो को लेकर मिल रही हैं। यात्रियों के अनुसार, सात सीटों की क्षमता वाले टेंपो में 10 या उससे अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं। महिलाओं और पुरुषों को एक-दूसरे से सटाकर बैठाया जाता है, जिससे असुविधा के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ जाती हैं।
यात्रियों का कहना है कि इन टेंपो की बाहरी स्थिति भले ठीक दिखाई देती हो, लेकिन अंदर की हालत बेहद खराब रहती है। कई वाहनों की सीटें फटी हुई हैं और जगह-जगह से कीलें निकली होने के कारण यात्रियों के कपड़े तक फट जाते हैं। शिकायत करने पर कुछ चालक कथित तौर पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की सरपरस्ती का दावा करते हुए यात्रियों को चुप रहने की नसीहत देते हैं।
दैनिक सफर करने वाले लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें ऐसी परिस्थितियों में यात्रा करनी पड़ती है। वे सवाल उठा रहे हैं कि राजधानी में खुलेआम हो रही ओवरलोडिंग और अनफिट वाहनों के संचालन पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही यह भी प्रश्न उठ रहा है कि यदि वाहन अनफिट हैं तो उन्हें परमिट और संचालन की अनुमति कैसे मिल रही है। हालांकि, इन आरोपों पर आरटीओ का पक्ष समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आ सका।