वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। भारत सरकार ने फार्मेसी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने फार्मासिस्ट ग्रेड-III के पद पर सीधी भर्ती के लिए बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी.फार्म) अथवा डॉक्टर ऑफ फार्मेसी (फार्म.डी) को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित कर दिया है। इससे पहले केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) में भी फार्मासिस्ट पद के लिए यही योग्यता लागू की जा चुकी है।
चीफ फार्मेसिस्ट एवं फार्मासिस्ट फेडरेशन सेंट्रल कमेटी के अध्यक्ष सुनील यादव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और रोगी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित और उच्च शिक्षित फार्मासिस्टों की आवश्यकता बढ़ रही है। ऐसे में यह निर्णय स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा।
उन्होंने कहा कि डिप्लोमा फार्मासिस्टों के हितों की भी अनदेखी नहीं होनी चाहिए। निजी अथवा सरकारी क्षेत्र में कार्यरत डिप्लोमा धारकों को केंद्रीय सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने के लिए उन्हें ब्रिज कोर्स के माध्यम से बैचलर स्तर तक अपग्रेड करने की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए।
सुनील यादव ने बताया कि भारत सरकार पहले ही डिप्लोमा फार्मासिस्टों के लिए बी.फार्म (प्रैक्टिस) ब्रिज कोर्स अधिसूचित कर चुकी है। इसके माध्यम से अनुभवी डिप्लोमा फार्मासिस्ट अपनी शैक्षणिक योग्यता को बैचलर स्तर तक उन्नत कर सकते हैं और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने देश के सभी विश्वविद्यालयों, फार्मेसी महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से बी.फार्म (प्रैक्टिस) ब्रिज कोर्स शीघ्र प्रारंभ करने की अपील की। उनका कहना था कि अनुभव और उच्च शिक्षा का समन्वय ही भविष्य की आवश्यकता है। इससे फार्मासिस्टों के कैरियर को नई दिशा मिलेगी, साथ ही रोगी देखभाल की गुणवत्ता और देश की स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता भी मजबूत होगी।