Breaking News

ज्ञानवापी विवाद: आस्था की लड़ाई लड़ रहीं चार वादिनियां, बोलीं- अपने खर्च पर सुप्रीम कोर्ट तक कर रहे पैरवी

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
वाराणसी। ज्ञानवापी परिसर से जुड़े शृंगार गौरी प्रकरण की चार वादिनियों का कहना है कि उनकी कानूनी लड़ाई किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने बताया कि निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हर सुनवाई में वे अपने खर्च पर पहुंचती हैं और मामले की पैरवी करती हैं।
चारों वादिनियों लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक ने बताया कि उनकी पहली मुलाकात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में मां शृंगार गौरी के दर्शन के दौरान हुई थी। बातचीत के दौरान उनके मन में यह सवाल उठा कि मां शृंगार गौरी के दर्शन वर्ष में केवल एक दिन ही क्यों कराए जाते हैं, जबकि वर्ष 1993 से पहले नियमित दर्शन-पूजन की व्यवस्था थी। इसी विचार ने आगे चलकर कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया।
इस मामले में दिल्ली निवासी राखी सिंह समेत पांच महिलाओं ने 18 अगस्त 2021 को वाराणसी की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में याचिका दाखिल की थी। बाद में राखी सिंह इस समूह से अलग हो गईं, लेकिन शेष चारों वादिनियां आज भी मुकदमे की पैरवी कर रही हैं। उनकी याचिका पर अदालत ने पहले ज्ञानवापी परिसर की वीडियोग्राफी और बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से वैज्ञानिक सर्वे कराने का आदेश दिया, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।
वादिनियों का कहना है कि उन्हें मिली सुरक्षा व्यवस्था का खर्च भी वे स्वयं वहन करती हैं और प्रत्येक सुनवाई में अदालत में उपस्थित रहती हैं। मामला ज्ञानवापी परिसर की बाहरी दीवार पर स्थित मां शृंगार गौरी, भगवान गणेश, हनुमान जी और नंदी के नियमित दर्शन-पूजन के अधिकार से जुड़ा है। फिलहाल इस प्रकरण में विभिन्न अदालतों में सुनवाई जारी है और देशभर की नजर इस मामले पर बनी हुई है।

Check Also

IIS जय सिंह को मिला ‘शान-ए-उत्तर प्रदेश’ सम्मान, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान

– IIS जय सिंह को लाइफ टाइम एक्सीलेंस अवार्ड, डॉ. भीमराव अंबेडकर विशिष्ट स्कॉलर सम्मान, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Updates COVID-19 CASES