वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
वाराणसी। काशी और पुरी के बीच प्रस्तावित कॉरिडोर देश के धार्मिक पर्यटन का नक्शा बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इसके तहत वाराणसी और ओडिशा के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने की साझा रणनीति तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, कॉरिडोर विकसित होने के बाद दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या में 30 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना है। तीन दिवसीय सम्मेलन में शामिल हुईं ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने कहा कि ओडिशा कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में काशी से पुरी के बीच एक विमान सेवा और कई ट्रेनें उपलब्ध हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर केंद्र सरकार और रेलवे से संपर्क कर अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा।
पर्यटन विभाग के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद वाराणसी में सालाना 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। वहीं, पुरी के जगन्नाथ मंदिर, भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर और कोणार्क में प्रतिवर्ष दो करोड़ से अधिक पर्यटक आते हैं। काशी-पुरी सर्किट बनने से उत्तर भारत के पर्यटक ओडिशा और दक्षिण व पूर्वी भारत के श्रद्धालु काशी आसानी से पहुंच सकेंगे। टूर ऑपरेटरों के लिए काशी-पुरी संयुक्त पैकेज तैयार करने की भी योजना है। ओडिशा में पर्यटकों को पुरी के साथ कोणार्क, रत्नागिरी, उदयगिरि, ललितगिरि, चिल्का, भीतर्कनिका और सिमिलिपाल जैसे स्थलों तक ले जाने की तैयारी है।
कॉरिडोर से धार्मिक स्थलों के साथ स्थानीय कला और हस्तशिल्प को भी नया बाजार मिलने की उम्मीद है। बनारसी साड़ी से ओडिशा की पट्टचित्र कला तक कारोबार बढ़ सकता है। पर्यटकों की ठहरने की अवधि बढ़ने से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय रोजगार को भी लाभ मिलने की संभावना है।